ये बड़ी खबर उत्तर प्रदेश से हैं ,और हाथरस में हुई 121 मौतों पर मामला एक बार फिर से गरमा गया हैं ,और उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार पर सवाल खड़े होना शुरू हो गया हैं ,यूपी पुलिस ने केवल 11 लोगों को गुनेहगार माना हैं और चार्जशीट दाखिल की हैं ,
बाबा के सत्संग पर आई रिपोर्ट का एक-एक शब्द हिला देगा, बाबा के चरणों की धूल ,कैसे बनी लोगों की जान की दुश्मन, और बड़ा सवाल ये की अबतक बाबा कहां छुपा बैठा हैं ,सारे सीक्रेट लोकेशन का राज खुल गया हैं, यूपी पुलिस ने हाथरस केस की चार्जशीट कोर्ट में जैसे ही दाखिल, वैसे ही सोशल मीडिया पर हंगामा खड़ा हो गया, जो लोगो नारायण साकार हरि के आश्रम पर बुलडोजर का इंतजार कर रहे थे, उन्हें बड़ा झटका लगा हैं , जिन्हें लग रहा था कि बाबा ही इस घटना का असली गुनहगार है, उनकी नींद उड़ गई, और अब आम जनता तो आम जनता, मायावती जैसी दिग्गज नेता भी मैदान में आ गए हैं और रिपोर्ट को देखकर हंगामा खड़ा कर कर दिया हैं
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के फुलराई गांव में दो जुलाई को हुए सत्संग के दौरान मची भगदड़ के मामले में पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं. इस भगदड़ में 121 लोगों की दुखद मृत्यु हुई थी, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे. पुलिस ने इस मामले में एक 3200 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है, जिसमें 11 आरोपी नामित किए गए हैं.इसको लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती ने यूपी सरकार को आड़े हाथों लीया हैं ,
मायावती ने आरोप लगाया है कि इन 11 आरोपियों में स्वयंभू बाबा सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ का नाम शामिल न होना राज्य सरकार के संरक्षण का संकेत देता है. उनके अनुसार, यह जनविरोधी राजनीति है और यह इंगित करता है कि सरकार कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के प्रति पक्षपाती रवैया रखती है. यह स्थिति जनता में चिंता पैदा करती है और आगे ऐसी घटनाओं को रोकना कठिन बना सकती है.
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं के पीछे राज्य सरकार की चुप्पी अनुचित है और इस रवैया के कारण प्रशासनिक कार्यों में निष्पक्षता सवालों के घेरे में आ जाती है. बता दें कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में मुख्य आयोजक देवप्रकाश मधुकर को प्रमुख आरोपी बनाया गया है. हालांकि, अन्य आयोजकों और सेवादारों के नाम और पतों का पता नहीं लगाया जा सका है. पुलिस ने मधुकर सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ के वकील के अनुसार, इनमें से एक आरोपी को जमानत मिल चुकी है.
बता दें कि 2 जुलाई को उत्तर प्रदेश के हाथरस में सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ का सत्संग हुआ था. इस सत्संग में भगदड़ मच गई थी. इसमें 121 लोगों की मौत हो गई थी. इसी हादसे में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा उर्फ सूरजपाल का नाम शामिल नहीं किया गया है, जबकि हादसा उन्हीं के सत्संग में हुआ था.
लेकिन सवाल ये पैदा होटा हैं कि ,यूपी पुलिस की कारवाही तो घटना के बाद, से ही तेजी से चल रही थी, फिर सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरी, पुलिस के शिकंजे से कैसे बच गया, क्या सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एपी सिंह के दिमाग ने, सूरजपाल को सलाखों के पीछे जाने से बचा लिया, या फिर कोई सियासी डील हुई है, सोची समझी साजिश के तहत उत्तर प्रदेश सरकार को, बदनाम करने के लिए मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम को बदनाम करने के लिए, नारायण साकार हरी और सनातन धर्म को जो बदनाम करने की साजिश की गई थी,
चार्चशीट दाखिल हो जाने के बाद भी तमाम सारे ,एंगल से भी जांच हो रही, हालांकि अभी कई तरह की जांच जारी है, पूरी तरह से नारायण साकार हरी को क्लीन चीट नहीं मिली है, लोगों के बीच में कई तरह की चर्चाएं हैं, पर सच्चाई यह है कि जब यूपी पुलिस ने सिकंदरा मऊ थाने में एफआईआर दर्ज की थी, तब भी उसमें बाबा का नाम नहीं था, इसकी विवेचना सीओ सटी कर रहे थे, जबकि सहायक विवेचक की भूमिका में थे, सदर कोतवाल विजय सिंह एसआईटी ने करीब, 150 प्रत्यक्ष दर्शकों के बयान इसमें दर्ज किए थे, जिनके बयानों और सबूतों के आधार पर, चार्जशीट तैयार हुई,
चार्जशीट में सूरजपाल का नाम भले ही पुलिस ने नहीं डालो हो ,लेकिन सूरजपाल के सेवादारों का नाम जरूर डाला गया, सेवादार देव प्रकाश मधुकर मेघ सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव ,राम लड़ाते उपेंद्र सिंह,संजू कुमार, राम प्रकाश शाके, दुर्वेश कुमार, और दलवीर सिंह का नाम चार सीट में है, जिसमें से मंजू देवी को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है,



















