फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर फाइट बेहद ही टाइट नजर आ रही है यहां मुकाबला चतुष्कोण होने से भाजपा प्रत्याशी की राह पथरीली हो गई है इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार रामनाथ सकरवार एकाएक मुख्य मुकाबले में आ गए वहीं अब तक मुकाबले में रहने वाली बसपा फतेहपुर सीकरी और आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट तक ही मुकाबले में दिखी वहीं फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट पर निर्दलीय रामेश्वर सिंह भाजपा का खेल बिगाड़ दे सकते हैं , लेकिन आधी आबादी का भाजपा की ओर रझान मौजूदा सांसद राजकुमार चाहर पर बड़ी राहत की खबर देता हुआ नजर आ रहा है फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट का इतिहास महज 15 साल पुराना है यह लोकसभा सीट वर्ष 2009 में अस्तित्व में आई थी आगरा लोकसभा सीट की फतेहपुर सीकरी और दयालबाग विधानसभा सीट जो अब आगरा ग्रामीण के नाम से जानी जाती है वह फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट का हिस्सा बन गई वह फिरोजाबाद लोकसभा सीट में शामिल रही बहा फतेहाबाद और खेरागढ़ सीट भी फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट में शामिल की गई
फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास वर्ष 2009 में विजय प्रत्याशी सीमा उपाध्याय दल बसपा
वर्ष 2014 में विजय प्रत्याशी चौधरी बाबूलाल दल भाजपा
वर्ष 2019 में विजय प्रत्याशी राजकुमार चाहर दल भाजपा
फतेहपुर सक्री लोकसभा सीट पर 2024 के रण में कुल 9 प्रत्याशी चुनावी समर में है
इस सीट पर इस बार 57.2 फीसदी वोट पड़े हैं
विधानसभा बार मतदान के आंकड़ों पर एक नजर विधानसभा आगरा ग्रामीण जिसमें 21227 वोट पड़े
फतेहपुर सीकरी विधानसभा में 22209 वोट पड़े
खेरागढ़ विधानसभा में 19841 वोट पड़े
फतेहाबाद विधानसभा में 19210 वोट पड़े वहा में 15547 वोट पड़े और
कुल मतदान 10 2914 हुआ इस लोकसभा सीट पर मतदान के दौरान जो रुझान मिले हैं वह त्रिकोड़िए मुकाबले की
तस्वीर पेश कर रहे हैं इस सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा है इस बार भाजपा प्रत्याशी राजकुमार जाहर की डगर गत चुनाव जैसी आसान तो बिल्कुल भी नहीं है इस लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पर क्षेत्र में नहीं आने के आरोपों को विपक्षी उम्मीदवारों ने जमकर धार दी, तो भाजपा के ही विधायक और इसी सीट से सांसद रहे चौधरी बाबू लाल की खुली बगावत भी भाजपा को झेलनी पड़ी, भाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर के सामने चौधरी बाबू के सुपुत्र चौधरी रामेश्वर सिंह ने ताल ठोकते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा, सीकरी सीट पर मुकाबला बहुकोशिकीय कि बसपा का गढ़ रही यह सीट इस बार के रण में मुकाबले की जो तस्वीर पेश कर रही है उसका अंदेशा तो राजनीतिक पंडितों को भी नहीं था इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मैदान में उतरना पड़ा सीएम योगी आदित्यनाथ ने फतेहपुर सीकरी सीट के लिए आगरा में तीन बार वोट मांगे वहीं प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम के साथ तमाम मंत्री और संगठन के पदाधिकारी चुनावी समर में उतरे ,
मतदान से पहले गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में दिख रही चुनावी बयार ने एकाएक मतदान के दौरान रुख बदला और मामला बेहद ही टाइट फाइट में बदल गया इस सीट पर क्षत्रिय मतदाताओं का 60 से 70 फीदी गठबंधन के पक्ष में पोलराइजेशन और जाट मतदाताओं में बंटवारा होने के साथ ही अखिलेश और राहुल की अपील पर बसपा के कोर voters ki तादाद में गठबंधन की और उन्मुख होना भाजपावोटर्स का अच्छी तादाद में गठबंधन की और उन्मुख होना भाजपा प्रत्याशी के लिए परेशानी का सबब बना तो पीएम मोदी और सीएम योगी की जन कल्याणकारी योजनाओं ने आधी आबादी का समर्थन भाजपा की ओर मोड़ चुनावी समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाई इस चुनाव में पूर्व वायु सेना प्रमुख आर केएस भदौरिया की करीब 15
दिन तक मौजूदगी क्षत्रिय मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए कितनी कारगर रही यह रिजल्ट के दौरान पता चला करेगा लेकिन फतेहपुर सीकरी में चुनावी फाइट बेहद ही टाइट है गठबंधन प्रत्याशी रामनाथ सिकरवार की हर वर्ग के मतदाताओं में पैठने सभी आंकलन गड़बड़ा दिए हैं चुनावी पड़ा बेहद ही कम मार्जन से कहीं भी झुक सकता है हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बेहद ही हैवी वेट प्रत्याशी राज बपर के
सामने राजकुमार चाहर करीब 5 लाख मतों से चुनाव जीतने में सफल रहे थे इस बार उनके इस समर्थकों ने 7 लाख पार का नारा भी दिया लेकिन भीतर घात और खुली बगा ने इस नारे के साथ न्याय नहीं किया बहराल मतदान से पहले चुनावी समर से बाहर दिख रहे राजकुमार चाहर मतदान के दौरान एक बार फिर फेवरेट की दौड़ में शामिल हो गए इस लोकसभा सीट पर चुनावी समीकरण इस कदर उलझे हैं कि भाजपा प्रत्याशी की जीत का समीकरण निर्दलीय रामेश्वर सिंह और बसपा के प्रदर्शन पर टिका है अगर रामेश्वर सीकरी और आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट पर अधिक वोट काटते हैं और बसपा की स्थिति कमजोर होती है तो गठबंधन प्रत्याशी लाभ की स्थि में रहेंगे वहीं आधी आबादी ने जो रुझान मोदी और योगी ki ओर दिखाया वह 70 फीदी भी सही उतरा तो राजकुमार चाहर लगातार दूसरी बार संसद की दहलीज लाग













