जनपद- मैनपुरी
जिले में बिना मान्यता धड़ल्ले से चल रहे मानक विहीन विद्यालय,कोई कक्षा 1से 8तक तो कोई1से 12 तक चला रहा विद्यालय शिक्षा विभाग के अधिकारी सो रहे चैन की नींद
उत्तर प्रदेश के जनपद मैनपुरी में शिक्षा विभाग की उदासीनता या लापरवाही कहे य उनकी मिली भगत जिससे जिलें में बिना मान्यता चल रहे विद्यालयों की बाढ़ आ गयी है। हर कोई छोटी से छोटी जगह और मानक विहीन जगह पर स्कूल को खोल कर बैठ जाता है।
अपने इस गोरख धंधे को शुरू कर देता है। हालांकि इस तरीके से खोले गए विद्यालय विद्यालय संचालकों के लिए कमाई का जरिया बन गए ऐसे विद्यालय आमजन की जेबो पर दिन दहाड़े डकैती जैसी डाल रहे है।
जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी से ऐसे मानक बिहीन विद्यालयों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
बात अगर ऐसे अवैध और बिना मान्यता के संचालित हो रहे विद्यालयों की करें तो जिले के हर कस्बे और कसबों के आसपास जुड़े बड़े-बड़े गांव में ऐसे विद्यालय चलते हुए आपको खूब दिखाई देने लगेंगे।
जिनके पास ना खुद की बिल्डिंग होगी बच्चों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था होगी। कोई टीन शेड के नीचे तो कोई खुले आसमान के नीचे कोई कोई तो एक या दो कमरे बनाकर उन पर हिंदी और इंग्लिश मीडियम के बोर्ड लगाकर विद्यालय संचालित करते हुए मिल जाएंगे।
जनपद मैनपुरी के बरनाहल विकासखंड में कई संचालित हो रहे हैं जिममें न बैठने की बच्चों की व्यवस्था है ना कोई मानक है। लेकिन सुविधाओं के नाम के बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर बिना मान्यता के ही विद्यालय संचालित कर रहे हैं।
जब इनमें काम करने वाले प्रधानाचार्य और टीचरों से बात की तो उन्होंने बताया कि मानता के लिए फाइल अप्लाई कर दी है तब तक किसी दूसरे विद्यालय से अटैच करके अपना विद्यालय चला रहे हैं।
विद्यालयों में बच्चों की बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। कोई कोई तो बेसमेंट के अंदर ही विद्यालय चल रहा है। कोई खुली छत के ऊपर बच्चों को बैठकर पढ़ाई कर रहा है।
आखिर ऐसे विद्यालय पर कारवाई कब होगी अभिभावकों की जेब पर डाल रहे डांका !
बात करें अगर उनकी पढ़ाई के बारे में तो उनकी किताबें अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ती है। कई कई विद्यालय तो अपने स्कूल से ही स्कूल की ड्रेस टाई बेल्ट और किताबें बेचने का काम कर रहे हैं।
बात करें अगर कक्षा एक से दो तक की किताबों की तो इन विद्यालयों की किताबें कक्षा 2 क़ी लगभग 3000 हजार के करीब और इससे आगे की कक्षाओं की किताबें 4000 हजार से 5000 तक में अभिभावको मिलती हैं।
जो कि मोटे कमीशन के चक्कर में स्कूल ही उपलब्ध कराता है यह स्कूल का प्रबंधन यही किताबें किसी एक दुकानदार के यहां रखवा कर उन किताबों पर पड़े भारी भरकम रेट के आधार पर अभिभावकों को बिकवाता है।
स्कूल मानक विहीन वसूल रहे मनमाफिक फीस
बात करें अगर इनके स्कूल के एडमिशन फीस की स्कूल की बिल्डिंग और उनके मानक कोई भी है नहीं लेकिन यह एडमिशन के फीस के नाम पर अभिभावकों पर मोटी फीस वसूल कर लेते हैं।
कई कई विद्यालय तो अपने मानक विहीन वाहनों को अपने विद्यालय में लगाकर उनसे अपने बच्चे ढोने का काम करा रहे है। जिसमें नौनिहालो के जीवन का खतरा बना रहता है।
लेकिन शिक्षा विभाग है जो ऐसे स्कूल संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है वह धड़ल्ले से अपनी स्कूल रूपी दुकान खोल कर बैठे हुए हैं।
संचालक मोटी कमाई के चक्कर में एक या दो वर्ष में बदल देते हैं किताबें
बात करें लीगल या अनलीगल विद्यालयों के संचालकों की तो इनके ऊपर सरकार का कोई भी अंकुश दिखाई नहीं पड़ रहा है। विद्यालय संचालक अपनी मर्जी के साथ ही मोटी कमाई करने के चक्कर में स्कूल में पढ़ाई जाने वाली महंगी महंगी किताबें को हर एक या दूसरे साल में बदल देते हैं।
जिस की पुरानी महंगी किताबें रद्दी के भाव में कबाड़ में बिक जाती हैं। अगर यही किताबों पर सरकार और शिक्षा विभाग इनके जल्द जल्द बदलने पर अंकुश लगा दे तो यही किताबें आगे बढ़ाने वाले विद्यार्थी के पीछे वाले विद्यार्थी को आधी कीमत में मिल जाती है।
लेकिन स्कूल संचालक अपनी मोटी कमाई के चक्कर में हर वर्ष अपने स्कूल की किताबें बदल देते हैं। लोगों की मांग है ऐसे स्कूल संचालकों के ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए।
अभियान चलाकर ऐसे विद्यालयों पर की जाएगी कार्रवाई
जब मामले को लेकर जिले क़ी बेसिक शिक्षा अधिकारी दीपिका गुप्ता से बात की तो उन्होंने बताया जल्द ही टीम बना कर ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर उनके ऊपर कारवाई की जाएगी और जिले में चल रहे बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों को बंद कराया जाएगा।
जिन -जिन अवैध विद्यालयों के मामले संज्ञान में आ रहे उनके ऊपर कारवाई कराकर उनका बंद कराया जा रहा है।
खबर एक्सपर्ट
रिपोर्ट:-अजय कुमार
करहल


















