सीएम योगी का राम भक्ति और रास्ट्र भक्ति पर कोई समझौता नही
केशव बोले कल्याण सिंह के पद चिह्नों पर चल रहे हैं सीएम योगी.
स्वर्गीय कल्याण सिंह से करदी योगी आदित्यनाथ की तुलना,देखते रह गए समर्थक
इन तमाम बयानों के बाद केशव प्रासाद मौर्य योगी आदित्यनाथ की तारीफ पर तारीफ करते नजर आ रहे है.
यानी एक कहावत तो सूनी होगी अपने “देर आये दुरस्त आये”
कभी कभी लोगों को ओवर कॉंफिडेंट हो जाता हैं ,फिर जब सचाई का सामना होता हैं तो सुब कुचा साफ़ हो जाता हैं की हम कितने पानी में ,
ये बात तो आप सब को समझाने के लिए हैं ,
आज से कुछ दिन पूर्व उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ,कल तक इशारा इशारों में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वही आज सीएम योगी की तारीफ़ पर तारीफ़ करते हुए नजर आ रहे हैं ,सबसे पहले तारीफों भरे ब्यान सुनिए,
बाइट : केशव म्योर्या
तो आपने सुना बड़े ही साफ तरीके से केशव प्रसाद मौर्य ने कहा की ना तो राम के रास्ते पर, ना राष्ट्र के नाम पर कल्याण सिंह ने कोई समझौता नहीं किया, वैसे ही सीएम योगी आदित्यनाथ भी राम और राष्ट्र के नाम से कोई समझौता नहीं कर रहे,
यानी अब यह साफ हो चुका है कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में कल्याण सिंह का अक्स दिखाई देने लगा है,
तो ऐसा क्या है जिसमें केशव प्रसाद मौर्य योगी आदित्यनाथ की तारीफ कर रहे हैं
कुछ दिन पहले का वाक्य है जब खुलकर दोनों ही आमने-सामने थे जिस दौरान कई बार केशव् प्रसाद मौर्या ने कहा था की, सरकार से संगठन बड़ा होता है, और माना यह गया कि यह इशारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ है,
तो सवाल ये आखिर इन हफ्तों में ऐसा क्या हुआ, कि केशव प्रसाद मौर्य के शुर बदल गए,
दरअसल जो बात इसके पीछे मानी जा रही है,तो उसके पीछे ये हैं कि, केंद्र यह नहीं चाहता कि उत्तर प्रदेश में कोई भी विभाजन सार्वजनिक तौर पर दिखाई दे जिसमें पार्टी कमजोर पड़ती हुई नजर आए,
केंद्र नहीं चाहता के उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं के बीच का विवाद, विपक्ष में बैठे नेताओं के हाथ का हथियार बन जाए, जिससे पार्टी में और कमजोरी बढ़ जाएगी,
दरअसल जब से केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ के मतभेद सामने आने लगे बयान बाजी सामने आने लगी जिससे विपक्ष को भाजपा को घेरने का मौका मिल गया,और विपक्ष ने इस मौके पर चौका देते हुए इसे भाजपा के खिलाफ जकड़ लिया,
कांग्रेस ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी लेकिन उससे बढ़कर अखिलेश यादव ने तो जमकर खींच और दोनों के बीच के विवाद को तंज करते रहते हैं,
इससे भाजपा के नेताओं को केंद्र में लगने लगा कि इनफ, इनफ जो मैसेज जहा जाना था , वहां पहुंच गया,यानी अब बीजेपी के ऑर्डर को घर में आना ही होगा,और यही बजह है ,कि एक संकेत के बाद सब कुछ ठीक हो गया है,अब उत्तर प्रदेश में बीजेपी के बीच कोई विवाद नहीं हैं सब नेता एक दूसरे के साथ खड़े हैं
ये बातें सार्वजनिक मंचों से कही जाने लगीं हैं, यानी एक हफ्ते में सब कुछ बदला बदला सा दिख रहा है, यानी 14 अगस्त को विभाजन त्रासदी दिविश मनाया गया था, उस दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य एक दूसरे का हाथ पकड़े नजर आए थे ,
उसके बाद अटल जी के कार्यक्रम में दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य , ब्रजेश पाठक, सीयाम योगी बेहद सहज तरीके से सामने नजर आए, तो ये लगने लगा था, की कोई ना कोई बातचीत पर्दे के पीछे हुई है,कोई ना कोए पेंचप हो रहा है,
यानी संगठन और सरकार को दोनों को कमा करने का तरीका बता दिया गया है,वो अब बर्दाश्त नहीं होगा।
यानी सबको एक स्थान पर आना होगा ,एक तरीके से काम करना होगा
क्या बदलना हैं,क्या नया करना हैं, ये सब शीर्ष नेतृत्व यानी केंद्र सरकार करेगी।
अब आपने पिछले 5 दिनों में देखा जो बयान बाजी हो रही थीं, वो अब रुक गईं है, और केशव प्रसाद मौर्य सीएम योगी की तारीफ कर रहे हैं, योगी आदित्यनाथ भी सब कुछ भूल कर काम करने के लिए तैयार हैं,जमकर विपक्ष में बैठे नेताओं को आड़े हाथों ले रहे हैं।
बाइट :सीएम योगी :कल्याण सिंह के कार्यक्रम में
हो गया सीएम योगी और RSS और BJP के साथ तगड़ा पेंचप
केशव प्रसाद के बदले शुर,देखते रह गए अखिलेश
केंद सरकार बोलीं यूपी में इनफ इज इनफ,आगे नहीं
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यानी कल शाम उत्तर प्रदेश में बीजेपी और RSS के साथ सीएम योगी के बीच में टलती आ रही बैठक समपन्न हो गई,और सबके लिये सन्देश में जारी हो गया ,देरशाल लखनऊ में एक बड़ी बैठक पांच कालिदास मार्ग पर हुई, जहां संघ के, बीजेपी संगठन के, और सरकार के, सभी शीर्ष नेतृत्व मौजूद थे ,बीजेपी की जो कोर कमेटी है,जिसमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, और प्रदेश अध्यक्ष, और संगठन महामंत्री होते हैं, अक्सर करके यह मीटिंग होती रहती है
लेकिन आज इसमें एक बड़ा नाम जुड़ा वह नाम है, अरुण कुमार का जो संघ के सहकारवा है, बीजेपी और संघ के बीच के समन्वय का दायित्व उनके पास है, बहुत समय से यह बैठक चल रही थी, कहां जा रहा था कि दिल्ली में भी यह मुलाकात होनी थी, लेकिन वह एन वक्त पर नहीं हो पाई,इसके अलावा प्रधानमंत्री की दो मुलाकात उत्तर प्रदेश के दो बड़े नेताओं से हो चुकी हैं, प्रदेश अध्यक्ष से तकरीबन एक डेढ़ घंटे की मुलाकात हुई, और घंटे भर की मुलाकात केशव प्रसाद मौर्य से हुई,
लेकिन प्रधानमंत्री की कोई मुलाकात उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से नहीं हुई, केंद्र सरकार से बड़ी-बड़ी मुलाकात हो चुकी, लेकिन आज इस मुलाकात को लेकर एक बड़ी गहरी नजर बनी हुई थी, लोगों की के आखिर संग, संगठन, और बीजेपी की सरकार में कोन सी जरूर आन पड़ी हैं की तीनों के समन्वय की जरूरत हैं,
चुनाव के वक्त भी तमाम सारी बातें उभर कर आई, कि बीजेपी के साथ संगठन का समन्वय नहीं था, सरकार और संगठन में समन्वय नहीं था, और जो विपक्ष द्वारा नॉरेटिव बने उनका कोई काट नहीं ढूंढा जा सका, कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास इतना भारी था, बीजेपी चुनाव हार गई लेकिन चुनाव के बाद भी बीजेपी की परेशानियां कम नहीं हुई, और तो और बड़े नेता एक दूसरे को टारगेट करने लगे, एक दूसरे के सर पर हर का ठीकरा, फोड़ने लगे लेकिन, अब बीजेपी को लगा के महीने भर, दो महीने तक यह बात ठीक है,
लेकिन आने वाले दिनों में चार राज्यों के चुनाव ,है उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर उपचुनाव है, अगर बीजेपी यूनाइटेड चेहरे के साथ खड़ी नहीं दिखाई देगी ,तो इसका असर ग्राउंड लेवल पर देखने को मिलेगा इसका बड़ा कामयाजा बीजेपी भुगतना पड़ सकता है, इन तमाम बातों को लेकर बीजेपी और संगठन के बीच मीटिंग वार्ता हुई
और आप खुद नेताओं के बदले शुर से अंदाजा लगा सकते हो ,की जो नेता एक दूसरे पर फायर हो रहे थे वहीं नेता एक दूसरे की बड़ाई करते हुए नजर आ रहे हैं यानी केंद्र से सीधा सन्देश हैं ,जिसे काम करना हैं करे ,अन्य लेकिन पार्टी में कोई भी निर्णय होगा वो केंद्र में बैठी सरकार के हस्तक्षेप के बाद ही होगा,
इस खबर पर आपकी क्या राय हैं यूपी में एक महीने से चली आ रहे आपसे मतभेद कम हो जाएंगे या नहीं











