सामान्य वर्ग पर काला क़ानून—देशभर में विरोध, करणी सेना मैदान में।
छात्र,अध्यापक,या कोई और, गलती हो या ना हो,सजा मिलेगी
कानून नहीं ये डर है —खून से पत्र,अधिकारी पद से त्याग पत्र
सरकार से आरपार की लड़ाई मंजूर
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कहते हैं — कानून सबके लिए बराबर होता है…लेकिन आज सवाल ये है कि
कानून के ऊपर भी क्या कोई कानून बैठ चुका है?
बड़ा सवाल ये भी हैं , क्या समान्य वर्ग का ही देश निकाला होगा
कैसे हर बार सामान्य वर्ग को उसकी “औकात” याद दिलाई जाती है,
और कहा जाता है— मोदी हैं तो मुमकिन है…
पर आज जनता पूछ रही है,
क्या ये मुमकिन अब सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए ही रह गया है?
सरकार ने नारा दिया था—
“सबका साथ, सबका विकास”
लेकिन क्या ये नारा आज ज़मीन पर- “कुछ का साथ और बाकी का विनाश” बनता जा रहा है?
प्रधानमंत्री कहते हैं— बंटेंगे तो कटेंगे… लेकिन हकीकत ये है कि
आज बंट कौन रहा है? और बाँट कौन रहा है?
दर्शकों, आज सवाल किसी जाति या धर्म के खिलाफ नहीं है—
आज सवाल है न्याय का, बराबरी का और संविधान का।
सरकार का एक नारा “एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे” -आज विश्वविद्यालयों में
कुछ छात्रों के लिए सुरक्षा,और कुछ के लिए डर बन चुका है।
सामान्य वर्ग पढ़-लिखकर बाहर निकल रहा है, देश छोड़ रहा है, सिस्टम से उम्मीद खो रहा है—
क्योंकि सरकार जानती है,कि उनकी आबादी कम है,और वोट बैंक की राजनीति में,कम संख्या का मतलब—कम अहमियत।
और सोचिए…
अगर आज आप चुप रहे,
तो कल आपके बच्चे
जाने-अनजाने
किस कतार में खड़े होंगे?
ये सवाल किसी के खिलाफ नहीं—
ये सवाल आपके भविष्य के हक़ का है।
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अगर आप कॉलेज में पढ़ते हैं या आपके घर में कोई हायर एजुकेशन ले रहा है, तो पिछले कुछ दिनों से आपने UGC Equity Regulations 2026 का नाम जरूर सुना होगा. सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक, हर जगह बस इसी बात की चर्चा है कि आखिर UGC ने ऐसा क्या नियम बना दिया जिससे इतना हंगामा खड़ा हो गया है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं आखिर क्या है पूरा मामला…
क्या है UGC का नया ‘इक्विटी’ नियम?
ugc एक सरकार की ऐसी संस्था हैं ,जो यूनीवर्सीटीयों को चलाने की परमीशन देती हैं,क़ानूनू से लेकर मान्यता तक ,लेकिन अब ये संस्था सवालों के घेरे में
दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 15 जनवरी 2026 से पूरे देश में नए नियम लागू किए हैं. इनका सीधा सा मकसद है कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में भेदभाव (Discrimination) को खत्म करना. UGC चाहता है कि किसी भी छात्र के साथ उसकी जाति, जेंडर या बैकग्राउंड की वजह से बुरा बर्ताव न हो.
ये नए नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह ले ली हैं . UGC का कहना है कि पुराने नियम अब आउटडेटेड हो गए थे, इसलिए उन्हें और ज्यादा सख्त और साफ बनाया गया है,ताकि हर छात्र को बराबर का सम्मान मिल सके.
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हर कॉलेज में होगी ‘स्पेशल सेल’
नए नियमों के मुताबिक, अब चाहे सरकारी कॉलेज हो या प्राइवेट यूनिवर्सिटी, हर जगह एक ‘Equity Cell’ (इक्विटी सेल) बनाना जरूरी होगा. ये सेल एक तरह की अदालत जैसा काम करेगी. अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है, तो वह यहां जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. संस्थान को उस पर तुरंत एक्शन लेना होगा.
विवाद की जड़ क्या है?
अब सवाल आता है कि अगर नियम अच्छे हैं, तो फिर बवाल क्यों हो रहा है? इस विवाद के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें हैं:
यूजीसी 2023 के नियम साफ कहते थे— किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर भेदभाव अपराध है।
सुरक्षा सबके लिए थी।ब्राह्मण हो, राजपूत हो, ओबीसी हो या एससी-एसटी— न्याय का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला था।
लेकिन 2026 में तस्वीर बदल जाती है।
अब नियम कहते हैं—जातिगत भेदभाव तभी माना जाएगा,जब वह एससी, एसटी या ओबीसी के खिलाफ हो।
मतलब साफ है—
अगर जनरल कैटेगरी का छात्र प्रताड़ित हो,तो कानून उसे पीड़ित मानने से ही इनकार कर देता है।
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करणी सेना जोरदार प्रदर्शन की तैयारी में
राजस्थान में करणी सेना ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ के विरोध में जोरदार प्रदर्शन की प्लानिंग में है. करणी सेना के जोधपुर अध्यक्ष मानसिंह मेड़तिया ने कहा, ‘यूजीसी जानबूझकर पूरी प्लानिंग के तहत यह कानून लेकर आया है. यह सवर्ण समाज को नीचा दिखाने और दबाने की तैयारी है. हम इसके विरोध में हैं और जमीनी स्तर पर जमकर विरोध करने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है.’ दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी है.
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत का कहना है की सरकार को इस काले कानून को वापस लेना होगा ,नहीं तो उग्र प्रदर्शन होगा, उन्होंने कहा कि सरकार के बताएं कि सामान्य वर्ग के नागरिकों ने सरकार के साथ क्या बुरा किया है, की लगातार काले कानून को सामान्य वर्ग पर थोपते चले आ रहे हो ,इसका केंद्र सरकार से जवाब देना होगा और कान खोलकर सुन लिया जाए कि यूजीसी काले कानून को तुरंत वापस लेना होगा, अन्यथा शीघ्र ही संसद के सामने जोरदार प्रदर्शन होगा
बाईट ;राजशेखवत
करनी सेना के नेता ओकेंद्र राणा ने सरकर के पूछा क्या हम आजाद भारत के गुलाम व्यकित हैं,आगे उनका कहना था आज हम नहीं बोलेंगे तो,कल आने वाली पीढ़ी गद्दार कहेगी, हम जानते हैं भाजपा सीएम योगी को ख़त्म करना चाहती हैं,जानबूझककर कमजोर करना चाहते हैं,उनका सीधा कहना हैं , योगी तुमसे बेर नहीं मोदी तेरी खेर नहीं
बाईट ;ोकेन्द्र राणा
अब लड़ाई किसी एक की नहीं रही , इस ugc की लड़ाई में नेताओं से लेकर अधिकारी तक मैदान में आ गए हैं , इसी कड़ी में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया हैं, और लखनऊ भाजपा के 11 पदाधिकारियों के इस्तीफे।
UGC के नए नियमों से आहत होकर लगातार इस्तीफा दिए जा रहे हैं ,कहा- हमारे सवर्ण समाज के बच्चों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
बाइट ; मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री,अधिकारी
विरोध का सुदर्शन चक्र चल चुका है। बीजेपी का कुरुक्षेत्र उसके भीतर ही है। 45 मिनिट तक DM आवास पर बंधक बना कर रखा
आगरा में UGC ड्राफ्ट एक्ट 2026 के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। बीजेपी नेता जगदीश पचौरी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और खून से लिखा पत्र भेजकर ड्राफ्ट एक्ट को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कानून शिक्षा में असमानता बढ़ाएगा और युवाओं के भविष्य को खतरे में डालेगा।
बाईट ;जगदीश पचौरी
यूजीसी ने यूनिवर्सिटी के प्रमुख की जवाबदेही भी तय की है और हर शिकायत पर एक्शन के लिए तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य किया है। नियमों का पालन न करने पर यूनिवर्सिटी के खिलाफ भी कड़े एक्शन का प्रावधान है। रेगुलेशन नोटिफाई होने के बाद देश के कई हिस्सों में शुरू हुआ विवाद बढ़ता गया और सोशल मीडिया पर भी हैशटैग ट्रेंड होने लगा। बीते शनिवार को इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
विरोधियों के तर्क:
– जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव
– झूठे मामलों में फंसने का खतरा
– स्वर्ण समाज को दबाने की साजिश
– कानूनी प्रावधान बहुत सख्त

















