आजकल पूरे भारत में मंदिर और वफ्फ बोर्ड की कॉन्ट्रोवर्सी बनी हुई हैं,जहां एक ओर हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा हैं तो वहीं वफ्फ बोर्ड के नाम और हिन्दुओं की जमीन ,मंदिर, और कीमती जगह को घेरा जा रहा हैं ,
Tirupati Temple Tirupati Laddu Controversy : आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाने वाला लड्डू, इन दिनों विवाद का केंद्र बना हुआ है.तिरुपति बालाजी के प्रसाद में जानवर की चर्बी और फिश ऑयल की पुष्टि होने के बाद यह मामला और गंभीर होता जा रहा है. वहीं अब इस मामले पर जनसत्ता दल के मुखिया और उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक राजा भैया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कुंडा विधायक ने देश के हिन्दू मंदिरों के लिए बड़ी मांग भी उठाई है.
राजा भैया ने की ये मांग
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, ‘श्री तिरूपति बालाजी के प्रसाद में बीफ़ चर्बी और मछली का तेल मिलाया जाना असंख्य हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था के साथ जधन्य अपराध है जो जानबूझकर किया गया है.इसका एक ही स्थाई निदान है, हिन्दू मन्दिरों की शुचिता बनाये रखने के लिये उन्हें अविलंब सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिये.’ इससे पहले एक कार्यक्रम में राजा भैया ने वक्फ बोर्ड पर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि, दुनिया के किसी भी देश, यहां तक कि किसी भी मुस्लिम देश में भी ऐसा बोर्ड नहीं है, तो आखिर भारत में क्यों है. वक्फ बोर्ड का निर्णय वक्फ अदालत कर रही हैं. ये कैसा क़ानून है कि वक्फ बोर्ड पर जिले की कचहरी, फिर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का अधिकार ही नहीं है.
Raja Bhaiya
@Raghuraj_Bhadri
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18h
श्री तिरूपति बालाजी के प्रसाद में बीफ़ चर्बी और मछली का तेल मिलाया जाना असंख्य हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था के साथ जधन्य अपराध है जो जानबूझकर किया गया है।
इसका एक ही स्थाई निदान है, हिन्दू मन्दिरों की शुचिता बनाये रखने के लिये उन्हें अविलंब सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिये।
आलोक मिश्र एक्स यूजर लिखते हैं
हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाना सामान्य बात हो गई है, मजाक बनाकर रख दिया है, सरकार धार्मिक मामलों में निष्पक्षता का राग अलापती तो फिर हिंदू मंदिरों पर उसका नियंत्रण किस अधिकार हो जाता है?
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर रखा जाना चाहिए
सुनील शुक्ल एक्स यूजर लिखते हैं :
अति आवश्यक है की सभी मंदिरो को सरकारी नियंत्र से मुक्त किया जाए एवम मंदिरो के संचालन एवम मंदिरो को समस्या को सुनने के लिए सनातन धर्म रक्षा बोर्ड बनाया जाए।
जब तक ऐसा नहीं किया जायेगा तब तक बदलाव मुश्किल है।
एक्स यूजर लिखते हैं : vipin mishra 🇮🇳
इस चित्र में सब कुछ साफ दिख रहा है कि कैसे हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ किया जाता है,
हिंदुओं के प्रति राजा भैया की विचारधारा हमेंशा से बिल्कुल शीशे की तरह साफ रहती है,
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अब सवाल बनता हैं
आप संविधान के हिसाब से मानने वाले हैं
संविधान एक हैं
देश एक हैं
कानून एक हैं
लेकिन बोर्ड दो क्यों ,
वफ्फ के आगे ने कोर्ट ,ना सुप्रीम कोर्ट,ना नेता ,ना अधिकारी ,ना कर्मचारी कोई कुछ नहीं हैं ,तो फिर ,कैसा संविधान,
वफ्फ के हिसाब से तो ,हिन्दू बोर्ड होना भी अति आवश्यक हैं ,जो हिन्दुओं की आवाज उठा सके, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब सारे देश की जनता पर वफ्फबोर्ड का कब्जा होगा
इस खबर पर आपकी क्या राय हैं ,जो हिन्दुओं के मंदिर ,वो सरकार के कब्जे में ,जो मस्जिद हैं, चर्च हैं वो सरकार के कब्जे में नहीं ,
ऐसा दूर व्यवहार क्यों ?














